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शनिवार, 6 दिसंबर 2025

मैथिली ठाकुर

Maithili Takur  

मैथिली ठाकुर एक भारतीय लोकगायिका हैं, जो मैथिली, भोजपुरी, हिंदी सहित कई भाषाओं में गीत गाने के लिए जानी जाती हैं।

मैथिली ठाकुर बिहार की विधायक। उम्र: ~25 साल।

उन्होंने 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में अलीनगर सीट से 11730 वोट से जीत दर्ज की। और भारत के सबसे कम उम्र के विधायक बनी

इनका जन्म 25 जुलाई 2000 को बेनीपट्टी, मधुबनी (बिहार) में हुआ था।

इनके पिता रमेश ठाकुर संगीत शिक्षक और माँ भावना ठाकुर गृहिणी हैं।

इनके दो भाई— रिशव ठाकुर और आयाची ठाकुरभी संगीत में इन्हें सहयोग करते हैं।

मैथिली ठाकुर को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि सोशल मीडिया और रियलिटी शो "इंडियन आइडल जूनियर" तथा "राइजिंग स्टार" में भाग लेने के बाद मिली।

Rising Star (2017) में वह पहली रनर-अप बनी थीं।

उनकी आवाज़ की मिठास और शास्त्रीय संगीत की पकड़ ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया।

मैथिली भक्ति गीत, लोकगीत, पारंपरिक गीत, कजरी, विदापत गीत, और सोहर जैसे कई शैलियों में महारत रखती हैं।

इनकी गाई हुई "कन्हा सो जा ज़रा", "लोरी", "शिव भजन", "कुमाऊँनी लोकगीत", "निमरिया" जैसे गीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए।

इनके यूट्यूब चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर हैं और इनके वीडियो करोड़ों व्यूज प्राप्त करते हैं।

मैथिली ठाकुर ने कई राज्यों की लोकसंस्कृति को पुनर्जीवित करने में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे युवा पीढ़ी लोकगीतों से जुड़ रही है।

उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई और लोकगीतों की सरलता का अनोखा मिश्रण मिलता है।

इन्हें "लोक संगीत की नई पहचान" के रूप में देशभर में सम्मानित किया जाता है।

मैथिली ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है। 

अपनी मेहनत, सादगी और मधुर आवाज़ से आज मैथिली ठाकुर विश्वभर में भारतीय लोक संगीत की एक प्रमुख पहचान बन चुकी हैं।


शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

 सर गंगानाथ झा पर

आज हम बात करेंगे  मिथिला के उस महान विभूति का जिसका नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है।

सर गंगानाथ झा भारत के प्रसिद्ध विद्वान, शिक्षक, दार्शनिक और संस्कृतज्ञ थे। वे विशेष रूप से भारतीय दर्शन, मीमांसा और वेदांत के गहन अध्येता के रूप में जाने जाते हैं।

इनका जन्म : 25 दिसम्बर 1871, को बिहार के तत्कालीन दरभंगा और वर्तमान में मधुबनी जिला के सरसों पाहि गाँव में हुआ था।

शिक्षा इन्होंने मैथिली, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेज़ी भाषाओं में गहरी विद्वता अर्जित की।

18 वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने संस्कृत में "कतिपयदिवसोद्गमप्ररोह" ग्रंथ लिखकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और उसके बाद "पूर्वमीमांसा के प्रभाकरमत" का मौलिक अनुसंधान लिखकर प्रयाग विश्वविद्यालय की "डी॰लिट" उपाधि प्राप्त किए। बाद में अगाध पांडित्य से "महामहोपाध्याय", विद्यासागर और "एल॰एल॰डी॰" उपाधियों से सुशोभित हुए और "महामहोपाध्याय डॉ॰ गंगानाथ झा" नाम से प्रख्यात हुए

1920 में ओरिएंटल संस्कृत कालेज बनारस के प्रथम भारतीय प्रिंसिपल नियुक्त हुए। 1923 ई॰ में डॉ॰ झा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रथम निर्वाचित vice chancellor हुए और लगातार चुनावों के फलस्वरूप 1932 तक vice chancellor का दक्षतापूर्ण निर्वाह किया।

उनके द्वारा bibhin bhashaon me 40 से अधिक ग्रंथ और शोध पुस्तकें लिखी गईं जिसमें

संस्कृत: में कतिपयदिवसोद्गमप्ररोह:; बेला महात्म्यम्; भक्ति कल्लोलिनी; भावबोधिनी; खद्योत (वात्स्यायन न्याय भाष्य टीका); मीमांसामंडनम्; और प्रभाकारप्रदीप।

हिंदी : में वैशेषिकदर्पण; न्यायप्रकाश; कविरहस्य; पटना यूनिवर्सिटी रीडरशिप लेक्चर्स ऑन हिंदू लॉ।

मैथिली: में वेदांतदीपिका

अंग्रेजी : में प्रभाकर स्कूल ऑव पूर्वमीमांसा; साधोलाल लेक्चर्स ऑन न्याय; फिलासॉफिकल डिसिप्लिन (कमला लेक्चर्स, कलकत्ता यूनिवर्सिटी); हिदू लॉ इन इट्स सोर्सेज, 2 भागों में; शंकराचार्य ऐंड हिज़ वर्क फ़ॉर द अप्लिफ्ट ऑव द कंट्री, पूर्वमीमांसा ऑव जैमिनि प्रमुख है।

भारतीय दर्शन के महान विद्वान उन्होंने मीमांसा दर्शन और वेदांत दर्शन पर कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की।

अनुवाद कार्य इन्होंने अंकों हिन्दू शास्त्रों और ग्रंथों का संस्कृत से अंग्रेज़ी में अनुवाद कर भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर पहुँचाया।

भारतीय संस्कृति और शिक्षा में योगदान के लिए इन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा 1915 me सरकी उपाधि प्रदान की गई।

उनके सम्मान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 'गंगानाथ झा रिसर्च इंस्टीट्यूट' 17 नवम्बर 1943 में स्थापित किया गया ।

सर गंगानाथ झा का निधन 9 नवंबर 1941 को प्रयागराज में हुआ

सर गंगानाथ झा भारतीय दर्शन, शिक्षा और संस्कृति के अमर स्तंभ थे। उनका योगदान भारतीय विद्या परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।