उपनिषद का उद्देश्य विद्यार्थियों के हित में काम करना ,उन्हें नई दिशा देना ,उनकी समस्याओं का समाधान

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मंगलवार, 17 अगस्त 2010

वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” (नागार्जुन)

नागार्जुन (३० जून १९११-५ नवंबर १९९८)मैथिली और हिन्दी क अप्रतिम लेखक आ कवि छलैथ । हुनकर असली नाम वैद्यनाथ मिश्र छल परंतु मैथिली साहित्य में यात्री आ हिन्दी साहित्य में ओ नागार्जुन नाम सं रचना केलैथ । हिनकर पिता श्री गोकुल मिश्र बिहारक दरभंगा जिलाक तरउनी गांव के एक किसान छलैथ आ खेती क अलावा पुरोहिती आदि क सिलसिला म आस-पासक इलाका में सेहो आयल-जायल करेत छलैथ। हुनकर संग संग नागार्जुन सेहो बचपने सं “यात्री” भ गेला । आरंभिक शिक्षा प्राचीन पद्धति सं संस्कृत में भेलेन किन्तु आगु स्वाध्याय पद्धति स शिक्षा बढ़लैन । राहुल सांकृत्यायन के “संयुक्त निकाय” का अनुवाद पढलाक बाद हिनकर इ इच्छा भेलैन जे इ ग्रंथ मूल पालि में पढ़ल जाए। ऐ के लेल ओ लंका चैल गेलेथ जते ओ स्वयं पालि पढैत और मठ के “भिक्षु ” क संस्कृत पढाबैत छलैथ । एते ओ बौद्ध धर्म क दीक्षा ल लेलेथ ।
प्रकाशित पुस्तक
छः टा से अधिक उपन्यास, एक दर्जन कविता-संग्रह, दू खण्ड काव्य, दूटा मैथिली;(हिन्दी में भी अनूदित) कविता-संग्रह, एकटा मैथिली उपन्यास, एकटा संस्कृत काव्य "धर्मलोक शतकम" आ संस्कृत सं किछु अनूदित कृति क रचयिता। कविता-संग्रह - अपने खेत में, युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, तालाब की मछलियां, खिचड़ी विपल्व देखा हमने, हजार-हजार बाहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस, तुमने कहा था, आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने, इस गुबार की छाया में, ओम मंत्र, भूल जाओ पुराने सपने, रत्नगर्भ।उपन्यास- रतिनाथ की चाची, बलचनमा, बाबा बटेसरनाथ, नयी पौध, वरुण के बेटे, दुखमोचन, उग्रतारा, कुंभीपाक, पारो, आसमान में चाँद तारे।व्यंग्य- अभिनंदन निबंध संग्रह- अन्न हीनम क्रियानाम बाल साहित्य - कथा मंजरी भाग-१, कथा मंजरी भाग-२, मर्यादा पुरुषोत्तम, विद्यापति की कहानियाँ मैथिली रचनाएँ- पत्रहीन नग्न गाछ (कविता-संग्रह), हीरक जयंती (उपन्यास)।बांग्ला रचनाएँ- मैं मिलिट्री का पुराना घोड़ा (हिन्दी अनुवाद) ऐसा क्या कह दिया मैंने-

नागार्जुन रचना संचयन
नागार्जुनक काव्य में अखन तक क पूरा भारतीय काव्य-परंपरा क जीवंत रूप में देखल जा सकेत अछि । हुनकर कवि-व्यक्तित्व कालिदास आ विद्यापति जेकां अनेको कालजयी कवी के रचना-संसार के गहन अवगाहन, बौद्ध आ मार्क्सवाद जेकां बहुजनोंमुखी दर्शन के व्यावहारिक अनुगमन आ सबसे बैढ़ क अपन समय और परिवेशक समस्या, चिन्ता आ संघर्षों से प्रत्यक्ष लगाव आ लोकसंस्कृति एवं लोकहृदयक पहचान स बनल अछि । हुनकर ‘यात्रीपन’ भारतीय मानस आ विषय-वस्तु क समग्र और सच् रूप में बुझै का साधन रहल हं । मैथिली, हिन्दी और संस्कृत के अलावा पालि, प्राकृत, बांग्ला, सिंहली, तिब्बती आदि अनेकानेक भाषा क ज्ञान हुनका एई में सहायक रहल । हुनकर गतिशील, सक्रिय और प्रतिबद्ध सुदीर्घ जीवन हुनकर काव्य में जीवंत रूप से प्रतिध्वनित-प्रतिबिंबित अछि। नागार्जुन सही अर्थों में भारतए मैट से बनल आधुनिक कवि छैथ ।जन संघर्ष में अडिग आस्था, जनता सं गहरा लगाव आ एक न्यायपूर्ण समाजक सपना, इ तीनटा गुण नागार्जुनक व्यक्तित्वएटा में नाहि,hunkar साहित्ययो में घुलल -मिलल अछि । निराला क बाद नागार्जुन असगरे एहन कवि छैथ, जे एतेक छंद, एतेक प्रकारक ढंग, एतेक प्रकारक शैलि और एतेक काव्य रूपक इस्तेमाल कएने छैथ ।